जिले के बाँसी विधानसभा सीट पर इस बार बाँसी राजघराने के सदस्य राजा जय प्रताप सिंह पर हर विरोधी की निगाहे टिकी हैं। सपा हो या बसपा, सबके इरादे राजकुमार के सियायी महल पर लगी हुयी हैं। यहा से सपा प्रत्याशी लाल जी यादव भाजपा को कडी टक्कर दे रहें हैं। राजमहल पर खतरा है सुरक्षा का उपाय कठिन हैं।
यह है आंकड़ा
बांसी विधान सभा में २० फीसदी मुस्लिम, १६ प्रतिशत ब्रहमन, भूमिहार, १४ फीसदी यादव, १२ फीसदी निषाद, ८ फीसदी लोधी राजपूत के अलावा ३० फीसदी शेष राजपूत, वैष्य, कायस्थ और अन्य पिछड़ी जातियां हैं। इसमें ब्रहमन,निषाद, लोधी व अन्य सवर्ण व अति पिछड़ी जातियें के गठजोड़ से जय प्रताप चुनाव जीत जाया करते थे। हालांकि वह किसी पिछउ़े के दुख दर्द में कम ही साथ खड़े होते थे। इसलिए उनके बीच उनका जनाधार घटने लगा।
क्या है मौजूदा हालत
लालजी यादव के कारण भाजपा विधायक जयप्रताप से पिछड़ी जातियों का मोह भंग होने लगा था। इस चुनाव में बसपा ने एमएलसी लालचंद निषाद को उम्मीदवार बना कर उनके पिछड़ वर्ग में छेद लगाने की चाल चली है। इसके अलावा ३२ हजार भाजपा के परपरागत लोधी वोटर के लिए लोधी समाज ने भी अपना उम्मीउदवार उतार दिया है। जिले का पांच सीटों में एक भी ब्रहमन उमीदवार न देने के कारण विप्र समाज भी भाजपा से नाराज है, ऐसे में भाजपा विधायक जयप्रताप का समीकरण कुछ गड़बड़ दिखता है।
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